नियम तय नहीं हो पाने के कारण अभी तक नहीं हो सका प्रकाशन, बालू का कारोबार निजी हाथों में देना तय

16 रेतघाट चिहिनत, पॉलिसी का पता नहीं
रायगढ़ । दिन, महीने, साल गुजरते जा रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार अभी तक रेत को लेकर पॉलिसी नहीं बना पाई है। कैबिनेट में निर्णय होने के बाद इसका प्रकाशन करवाकर नीलामी प्रक्रिया प्रारंभ कराई जानी थी ताकि जनवरी 2026 तक उत्पादन प्रारंभ हो जाता, लेकिन अभी तक नीति-नियम को लेकर असमंजस है।
काग्रेस सरकार की तरह भाजपा ने भी रेत को लेकर नई पॉलिसी लागू करने का ऐलान किया है। इसमें राजस्व बढ़ाने का उद्देश्य प्रमुख है। इसके लिए निजी हाथों में रेत का कारोबार सौंपने पर सहमति दी गई है। मतलब ग्राम पंचायतों के हाथों से अधिकार छीनकर बाहरी व्यापारियों को दिया जाएगा। इसके लिए नई पॉलिसी अब तक सामने नहीं आ सकी है। राजपत्र में प्रकाशन के बाद ही रेत नीति को लागू होना माना जाएगा। इसके बाद प्रदेश में एक साथ नीलामी प्रारंभ होगी।
रायगढ़ जिले में सरकार के निर्देश पर रेत खदानों के दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। 16 रेत घाटों को चिन्हित किया गया है सके। निजी लोगों को रेत खदानें ताकि समय आने पर नीलामी हो आवंटित करने के लिए कुछ नियमों में असमंजस की स्थिति है। डर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रेत खदान में टकराव न हो जाए। पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में रेत खदानों का आवंटन ग्राम पंचायत को देने पर भी सरकार कोई निर्णय नहीं कर सकी है। कहा जा रहा है कि सभी रेत खदानों का संचालन निजी लोग ही करेंगे। बेस प्राइस बढ़ा दी गई है। उत्पादन का लक्ष्य भी बढ़ाया जाएगा ताकि रेत की कमी न हो। कम उत्पादन होने पर भी सालाना अनुमति प्राप्त मात्रा की रॉयल्टी जमा करनी होगी। राजपत्र प्रकाशन के पूर्व जिले में गुपचुप तैयारी की जा रही है।
इन रेत खदानों की होगी नीलामी
रायगढ़ जिले में 2014 के पूर्व 39 खदानें संचालित थी जो पंचायतों के अधीन थी। राजस्व के नाम पर बहुत कम रॉयल्टी मिलती थी क्योंकि पर्धियां कम जारी की जाती थी। अब 16 खदानें चिहिनत की गई है। घरघोड़ा में कंचनपुर, कारीछापर, छिरभौना, खसिया में दर्रामुड़ा, बरभौना, धरमजयगढ़ में पुसल्या, बायसी, जोगड़ा-अ, जोगड़ा-ब, रिलो, रायगढ़ में सरडामाल, सहसपुरी, लेबड़ा, डुमरपाली,औराभांठा, दुलोपुर का आवंटन होगा। पुसौर में एक भी रेत घाट नहीं होगा।
अवैध रेत परिवहन पर चुप्पी
सरकार के निर्देश पर रेत घाट चिहिनत जरूर किए गए हैं लेकिन इनसे उत्पादन कब शुरू होगा, इसे लेकर संदेह है। इसकी वजह पर्यावरण स्वीकृति है जिसमें समय लगता है। वर्तमान में जिले में एक भी रेत खदान संचालित नहीं है। इसके बाद भी घरघोड़ा, तमनार क्षेत्र में परिवहन हो रहा है। दै.के.प्र.



