विरासत पर संकट : नाई समाज की करुण पुकार

धरमजयगढ़। कभी अपने हुनर और परंपरा से जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बने नाई समाज के समक्ष आज अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो गया है। विगत दिनों धरमजयगढ़ नगर में नाई समाज ने जहां संगठनात्मक मजबूती दिखाते हुए अपने संघ के अध्यक्ष का चुनाव किया, वहीं समाज के पदाधिकारी राजू ठाकुर ने एक मार्मिक अपील करते हुए भावनाओं से भरा वीडियो साझा किया।
वीडियो में क्या कहा सुनिए
वहीं नाई समाज के पदाधिकारी राजू ठाकुर ने अपने संदेश में कहा कि नगर और कस्बों में अब बाहरी राज्यों से आए लोग नाई का कार्य करने लगे हैं, जिससे मूल नाई समाज की आजीविका ही नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान भी संकट में पड़ रही है। उन्होंने गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा – “यदि अन्य समाज के लोग नाई का कार्य करेंगे तो क्या उनके हाथों से शुद्धिकरण संभव है?”उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति यूं ही बनी रही तो नाई समाज अपनी परंपरा और पुश्तैनी धरोहर से वंचित हो जाएगा। इसीलिए प्रदेश स्तर पर एकजुट होकर विरोध करने की बात कही गई है।
उनके अनुसार, “यह काम हमारे पूर्वजों की धरोहर है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी निभाते आए हैं, और आज इसे हमसे छीना जा रहा है।”धरमजयगढ़ में नाई समाज की यह आवाज़ केवल आर्थिक संकट की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्तित्व की भी पुकार है। यह प्रश्न अब केवल एक समाज का नहीं, बल्कि उस परंपरा का भी है जो पीढ़ियों से समाज की सेवा करती आई है।



