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झूठ, धोखा, जिद्द,आक्रोश फिर हुआ जनसुनवाई स्थगित। पढ़िए पूरी कहानी

जिला जाने के बाद मुख्या का बाहर ना आना, जिसके बाद ग्रामीणों की जिद

जन आक्रोश को देख मेसर्स अंबुजा सीमेंट लिमिटेड कंपनी का जनसुनवाई हुआ स्थगित

रायगढ़ :- धरमजयगढ़ के पुरुंगा में भूमिगत कोयला खदान अडानी समूह का मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड कंपनी को खदान का आवंटन 08/06/2023 को हुआ था और इसके चालू होने की निर्धारित तिथि 08/12/2028 है। जिसका पर्यावरण सहमति को लेकर 11/11/2025 को लोक सुनवाई होना था परन्तु जिला दंडाधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 1952 के अनुसार दिनांक 10/11/2025 को पत्र जारी कर लोक सुनवाई को आगामी आदेश तक स्थगित किया गया ।

पेशा कानून के तहत विशेष ग्रामसभा का आयोजन

पांचवीं अनुसूची 1996 एवं छ.ग. पेशा कानून 2022 के अंतर्गत यह क्षेत्र आता है जिसमें 18 और 19 अक्टूबर को तेंदुमुड़ी, साम्हरसिंघा और पुरुंगा में पंचायत द्वारा विशेष ग्रामसभा बैठक कर ग्रामसभा में सर्व सहमति से जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

जनसुनवाई निरस्त करने का ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीण रायगढ़

बतादे कि 22 अक्टूबर को पुरुंगा भूमिगत कोल माइंस प्रस्तावित गांव पुरुंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी के सैकड़ों ग्रामीण, धरमजयगढ़ सर्व आदिवासी समाज ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र सिदार और धरमजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया रायगढ़ कलेक्टर ऑफिस पहुंचकर जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर पहुंचे जहां बोला गया कि जनसुनवाई करने को लेकर ग्रामसभा का प्रस्ताव पहले ही दे दिया गया जब ग्रामीणों द्वारा बोला गया कि प्रस्ताव का कॉपी अगर आपके पास है तो उसे हमें दिखाया जाए वही पूर्व में अगर प्रस्ताव दिए है तो उसे निरस्त किया जाए ।

धरमजयगढ़ जनपद के सभाकक्ष में हुई बैठक

23 अक्टूबर को धरमजयगढ़ जनपद में हुई बैठक में तीनों गांव के सरपंच और उपसरपंच को बुलाकर धरमजयगढ़ एसडीएम और कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बैठक किया गया वही जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा एक समाचार जारी किया गया जिसमें लिखा गया कि ग्रामीणों ने 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई में शामिल होने की दी सहमति यह खबर की जानकारी ग्रामीणों को होते ही ग्रामीण हुए आक्रोशित, तत्काल रात में साम्हरसिंघा गांव में बैठक कर जनसुनवाई का विरोध करने की बात कही गई।

ग्रामीण मिले धरमजयगढ़ पीडब्लूडी रेस्ट हाऊस में सांसद से, माहौल हुआ गर्म

प्रस्तावित गांव के ग्रामीण धरमजयगढ़ रेस्ट हाऊस में रायगढ़ लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया से मिलकर जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर पहुंचे जहां 23 अक्टूबर को धरमजयगढ़ जनपद के सभा कक्ष की बैठक के बारे में भी चर्चा हुई जिसमें ग्रामीणों ने कहा कि बैठक में सिर्फ सरपंच और उपसरपंच से चर्चा का गलत समाचार प्रकाशित किया गया जिला संपर्क विभाग द्वारा जिसपर धरमजयगढ़ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा बोला गया कि मेरे द्वारा सभी ग्रामीणों को बुलाया गया था यह बात सुनकर सरपंचों द्वारा तत्काल पलटकर जवाब दिया गया कि आप सिर्फ सरपंच और उपसरपंच को बैठक में बुलाए थे, अधिकारी के झूठ सुनकर माहौल बिगड़ने लगा जिसके बाद कार्यकर्ताओं द्वारा किसी तरह ग्रामीणों को समझाकर माहौल को शांत कराकर वापस गांव भेजा गया।

धरमजयगढ़ में मौन रैली निकालकर सौंपा गया ज्ञापन

29 अक्टूबर को सैकड़ों ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियो द्वारा धरमजयगढ़ नगर में भारत के संविधान की किताब लेकर मौन रैली निकालते हुए पहले जनपद पंचायत फिर वन मंडल अधिकारी उसके बाद धरमजयगढ़ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ऑफिस जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपी गई।

गांव से भगाया तो गुमराह कर कंपनी कर्मचारी द्वारा जनसुनवाई के सहमति को लेकर फर्जी युवक खड़ा कर सौंपा ज्ञापन

1 नवंबर को अडानी ग्रुप के कर्मचारी द्वारा पुरुंगा गांव में जाकर भूमिगत खदान से गांव और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा करके बैठक किया जा रहा था जिसपर अचानक बैठक के दौरान ग्रामीणों से कंपनी के कर्मचारियों को गांव से बाहर भगाया जिसके बाद कंपनी के कर्मचारी द्वारा बरतापाली और सागरपुर गांव के करीब 20 युवक को नौकरी के आर्थिक लाभ का प्रलोभन देकर सागरपुर के युवक को पुरुंगा निवासी बताकर खदान खोलने और जनसुनवाई करवाने की सहमति को लेकर धरमजयगढ़ एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।

युवकों ने मानी गलती, कंपनी का षड़यंत्र का हुआ पर्दाफाश

2 नवंबर को जैसे ही समर्थन का खबर की जानकारी प्रस्तावित ग्रामीणों की हुई वीडियो के आधार पर युवकों की पहचान कर बरतापाली गांव पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण, जहां गांव में सामाजिक बैठक किया गया जहां पता की कंपनी का कर्मचारी खितीभूषण डनसेना आर्थिक लाभ का प्रलोभन देकर कागज में दस्तखत करवाया जबकि युवक को इसकी कुछ जानकारी ही नहीं थी धोखे में रखकर ज्ञापन सौंपने की बात बैठक में युवकों द्वारा की गई जिसके बाद जिन युवकों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था उनके द्वारा की गई गलती का पक्षतावा करते हुए वीडियो भी जारी किया गया। वही धरमजयगढ़ एसडीएम आफिस जाकर 1 नवंबर को सौंपे गए ज्ञापन को निरस्त करने की बात कही गई।

शांतिपूर्ण विरोध रैली और धरना प्रदर्शन का सौंपा ज्ञापन

4 नवंबर को प्रस्तावित गांव के सरपंच, उपसरपंच सहित आस पास के करीब 10 पंचायत के सरपंच धरमजयगढ़ एसडीएम आफिस पहुंचकर 6 नवंबर को धरना प्रदर्शन और विरोध रैली करने को लेकर ज्ञापन सौंपा गया । साथ ही ग्रामीणों का कहना की अगर ग्राम सभा सहमति का प्रस्ताव आपके कार्यालय में है तो उसकी कॉपी उपलब्ध करवाए जिसपर धरमजयगढ़ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा बोला गया कि हमारे पास कोई भी दस्तावेज नहीं है जिला में होगा वहां मिल जाएगा।

जवाब से असंतुष्ट होकर 6 नवंबर को धरमजयगढ़ के जगह रायगढ़ पहुंचे ग्रामीण

करीब 30 चार पहिया वाहन से प्रस्तावित गांव के ग्रामीण रायगढ़ कलेक्टर ऑफिस जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर पहुंचे। जहां पहले सरपंचों द्वारा ग्रामसभा सहमति का दस्तावेज का मांग किया गया जब उन्हें दस्तावेज नहीं है बोला गया तो जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की गई पर उनके बातों को अनसुना किया गया तब जाकर किया सैकड़ों की संख्या में मौन रैली निकालकर कलेक्टर ऑफिस से महज 100 मीटर की दूरी पर प्रशासन द्वारा जो बैरिकेट लगाया गया था वहां ग्रामीण धरने पर बैठ गए। दोपहर से शाम हो गई रात हो गई जिला कलेक्टर को छोड़ अधिकारी कर्मचारी ग्रामीणों से बात करते रहे पर कलेक्टर साहब बाहर ग्रामीणों से मिलने नहीं आए। ग्रामीणों भूखे खुले आसमान के नीचे रात गुजारे वही ग्रामीणों की दशा देख रायगढ़ के समाजसेवक, आस पास के रहवासी ग्रामीणों को रात में उनसे जो भी बना चाय, मुर्रा, मिक्सचर, चना यहां तक सोने के लिए चद्दर और कंबल तक उपलब्ध करवाए।

नहीं मिले रायगढ़ कलेक्टर ग्रामीणों से

30 घंटे बीत जाने के बाद भी रायगढ़ कलेक्टर ग्रामीण से मिलने बाहर नहीं आए, ग्रामीणों का कहना की एक बार आकर हमसे मिले बात करे हम वापस जाने को है तैयार पर नहीं मिले कलेक्टर। ग्रामीणों को जिले के मुख्या का बर्ताव से क्रोधित होकर 7 नवंबर को गांव वापस जाने के फैसला लिया फिर हुआ उग्र आंदोलन।

3 दिन और रात गांव में बाहरी व्यक्तियों का रहा प्रतिबंध, डेट रहे ग्रामीण

प्रस्तावित गांव के ग्रामीणों को आस पास के करीब 30 पंचायत के लोगों का पूर्ण समर्थन मिला उनके द्वारा 9, 10 और 11 नवंबर 3 दिन और रात तीनों गांव की सीमा में सैकड़ों ग्रामीण और पुरुष बाहरी व्यक्तियों को गांव में घुसने के लिए प्रतिबंधित कर दिया रात में भी डेट रहे कोई भी व्यक्ति घरों में चूल्हा तक नहीं जलाए सामूहिक 3 जगह भंडारा चलता रहा । प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वृहद रूप से जनाक्रोश देख 10 नवंबर को जनसुनवाई आगामी आदेश तक स्थगित करने को लेकर पत्र भी जारी किया गया फिर भी 11 नवंबर शाम तक ग्रामीण पुरुंगा में बैठे रहे।

वही ग्रामीणों का एक तरफ यह भी कहना की अगर कलेक्टर साहब रायगढ़ में बाहर आकर हम ग्रामीणों से अगर मिल लिए रहते तो आज शायद जनसुनवाई स्थगित नहीं होता क्योंकि हम गांव के ग्रामीण बहुत ही भावुक होते है शायद उनकी बातों को मान लेते पर उनका बाहर आकर हम ग्रामीणों से नहीं मिलना हम लोगों में काफी ज्यादा आक्रोश भर दिया जिससे प्रशासन को जनसुनवाई स्थगित करना पड़ा ।

प्रशासन द्वारा जनसुनवाई को स्थगित का आदेश तो निकाला गया है पर प्रस्तावित गांव के लोग अब और भी ज्यादा जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रशासन से तैयारी करने में लगे हुए है क्योंकि पहले जिम्मेदार ग्रामीणों को यह कहकर गुमराह किया कि ग्राम सभा पहले जनसुनवाई करने को लेकर सहमति का प्रस्ताव दे दिया है जो की अबतक किसी से सहमति का दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा सके, बाहरी लोगों को प्रस्तावित गांव का बताकर ज्ञापन सौंपकर षड़यंत्र इन सभी बातों को ध्यान में रखा गया है।

Niraj Biswas

नीरज विश्वास, सीजी चौपाल न्यूज़ . पता - रायगढ़ , छत्तीसगढ़ मो . 8818972003

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