बच्चे और जनता कार्यक्रम देखे या ना देखे धरमजयगढ़ के जनप्रतिनिधियों को सम्मान के साथ कुर्सी चाहिए।
कुर्सी पर, टेबल पर, बाईक पर और ट्रैक्टर पर चढ़कर आम नागरिक स्वतंत्रता दिवस का सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मजबूर
बड़े बुजुर्गों ने सही कहा है कुर्सी के सामने जनप्रतिनिधियों को जनता का समस्या नहीं दिखता ।
एकबार सुनिए क्या कहते है सत्ता पक्ष के जमीनी कार्यकर्ता
धरमजयगढ़ भाजपा मंडल उपाध्यक्ष मुकेश हालदार का कहना की बच्चों के साथ बहुत गलत हुआ है, पहले इनकी टीम विरोध करती थी, पर अब नहीं, शायद अब कुर्सी पाने के बाद जनकल्याणी समस्याओं से दूर नजर आ रहे है। जिस वजह से कोई भी मंच पर बैठा सत्तापक्ष का जनप्रतिनिधि एक बार भी बच्चों और जनता की समस्या को नहीं समझा बस मुखदर्शी बनकर मंच पर बैठे रहे।
मंच में धरमजयगढ़ मंडल कांग्रेस अध्यक्ष संतोष प्रधान दर्ज की विरोध
सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने आए ग्रामीण और बच्चों को कार्यक्रम देखने में हो रही समस्या को देखकर धरमजयगढ़ मंडल कांग्रेस अध्यक्ष संतोष प्रधान को रहा नहीं गया तो उनके द्वारा मंच में ही विरोध दर्ज कराई गई पर फिर भी बड़े शान से बैठे रहे जनप्रतिनिधि जिससे कार्यक्रम देखने आए लोगों ने दबी जुबा से कहने लगे कि कुर्सी पाकर अब जनता की समस्या से शायद इनका कोई नाता नहीं रहा । नगर में आज स्वतंत्रता दिवस के दिन हुए समस्याओं का चर्चा दिनभर चलता रहा।
कुर्सी पर चढ़कर सांस्कृतिक कार्यक्रम देखती दिखी महिला पार्षद

बाईक के ऊपर चढ़कर देख रहे कार्यक्रम
देखिए किस तरह छोटे छोटे बच्चे स्कूलों का कार्यक्रम देखने को मजबूर
बच्चों तक नहीं पहुंचा पानी, मंच के किनारे पड़ा रहा पानी पाउच की बोरी
नगर के लोगों में चर्चा का विषय की मंच तो पहले से बना था बस जिम्मेदारों को साउंड सिस्टम और जनप्रतिनिधियों को सम्मान पूर्वक बैठाकर सांस्कृतिक प्रोग्राम करना था पर यहां तो स्कूली बच्चों द्वारा कई दिनों से मेहनत कर दिया गया प्रोग्राम का कोई महत्व ही नहीं रहा लोग कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी मशक्कत किया। अगर कार्यक्रम को मंच पर संचालित कर दिया जाता तो शायद जनप्रतिनिधियों की भावनाओं को ठेस पहुंचता इसलिए बच्चों को मंच नहीं दिया गया जिस वजह से जिम्मेदारों द्वारा बच्चों के ही कार्यक्रमों को नीचे जमीन में करा दिया गया। जिससे मंच में भी पीछे कुर्सी में विराजमान जनप्रतिनिधियों को भी कार्यक्रम नहीं दिख सका। जब बुद्धिजीवी ही अपना वाह वाही लेने में लगे रहेंगे तो नगर में चर्चा तो होगी ही।



