कमजोर गरीब किसानों का शेड तोड़कर अपना पीठ थपथपा लिए जिम्मेदार…

ऊरगा से पत्थलगांव भारतमाला मार्ग में जांच टीम का नहीं हो सका अबतक गठन
धरमजयगढ़ :- भारतमाला परियोजना जो कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है जिसमें छत्तीसगढ़ में मुआवजे प्रकरण को लेकर बड़े बड़े घोटाले सामने आए है वही घोटालेबाज अफसरों पर प्रशासन द्वारा लापरवाही बरतने को लेकर कार्यवाही भी की गई है।
ऊरगा से पत्थलगांव मार्ग निर्माण की जांच के लिए नहीं हो सका अबतक टीम का गठन
आपको बतादे कि अभनपुर मुआवजा घोटाले जांच के बाद अबतक सरकार ऊरगा से पत्थलगांव निर्माण हो रहे भारतमाला परियोजना में अधिग्रण और मुआवजा प्रक्रिया की जांच के लिए जमीनी स्तर पर कोई टीम गठित नहीं हो सकी जो कि शासन प्रशासन की अपने जिम्मेदारों के प्रति सुस्त रवैए को दर्शा रहा है।
कमजोर वर्ग पर हुई तोड़फोड़ की कार्यवाही
आपको बतादे कि हालही में धर्मजयगढ़ के मेढ़रमार बस्ती मे भारतमाला परियोजना का मार्ग का एलाईमेंट कुछ बदला था जिसमें मेढ़रमार गांव में किसानों द्वारा किए गए शेड निर्माण एलाईमेंट में आ रहे थे। अवैध निर्माण की शंका पर धरमजयगढ़ तहसीलदार द्वारा शेड निर्माण किए लोगो को नोटिस जारी किया गया जिसमें 28 अगस्त तक शेड हटाने को कहा गया था नहीं हटाने के स्थिति में पूरी जिम्मेदारी किसानों की होगी। जिसके बाद किसानों द्वारा हाईकोर्ट का शरण लिया गया पर हाईकोर्ट का कोई भी जवाब आए उससे पहले 30 अगस्त को जेसीबी चलाकर स्थानीय प्रशासन द्वारा उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में तोड़फोड़ की कार्यवाही की गई। इस कार्यवाही को दिखाकर शायद प्रशासन अपना पीठ थपथपा लिए।
किसानों को है उम्मीद, उनके पक्ष में हाईकोर्ट देगा फैसला
जिन जिन किसानों के शेड पर तोड़फोड़ की कार्यवाही हुई है वे बड़ी आस लगाए हुए है हाईकोर्ट के फैसले पर क्योंकि स्थानीय प्रशासन द्वारा शेड तो तोड़ दिया गया पर अगर हाईकोर्ट किसानों के हित में अगर फैसला देती है तो शेड निर्माण का क्षतिपुति का राशि उन्हें प्राप्त हो जाएगा जिससे किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी।
प्रशासन द्वारा अबतक पूर्व में हुए मुआवजा प्रकिया की जांच के लिए अबतक टीम का गठन नहीं करना वही कुछ किसानों का कार्यवाही का हवाला देकर निर्माण कार्य पर तोड़ फोड़ कर अपना पीठ थपथपाना कई तरह के सवालों को जन्म दे रहा है। अब देखना है कि आखिर हाईकोर्ट तोड़फोड़ की कार्यवाही लेकर क्या फैसला देता है।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में कोयला उत्खनन को लेकर 4 कोल माइंस प्रस्तावित है इनके द्वारा धरमजयगढ़ में प्रस्तावित भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक तो लगा दी गई पर शायद निर्माणकार्य पर रोक नहीं लगाया गया है अगर समय रहते जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिया गया तो पुनरावृत्ति जैसी घटना हो सकती है।



