नवंबर माह में होगा पर्यावरण सहमति के लिए पुरुंगा में जन सुनवाई

तीन गांवों की 870 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण
धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले में बेहद तेजी से कोयला खदानों का आवंटन होता जा रहा है। उतनी ही तेजी से इनके डेवलपमेंट का रास्ता साफ किया जा रहा है। जंगलों, पहाड़ों, नदियों की चिंता किए बगैर कोयला खदानों को अनुमति दी जा रही है। अब एक नया कोल ब्लॉक पुरुंगा भी कतार में है। अंबुजा सीमेंट्स ने अगले महीने जनसुनवाई रखी है। सबसे अहम बात यह है कि इस कोल ब्लॉक के क्षेत्र में 1500 एकड़ जंगल आ रहा है।घरघोड़ा और तमनार के बाद अब खनन विकास ने धरमजयगढ़ का रुख किया है। सघन वन क्षेत्र होने के कारण अब तक कोई भी कंपनी धरमजयगढ़ तहसील में कोल ब्लॉक शुरू करने में गंभीर प्रयास नहीं किए थे, लेकिन अडाणी ग्रुप की एक और कंपनी अंबुजा सीमेंट्स ने पुरुंगा कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया है।
इस माइंस का आवंटन कमर्शियल माइनिंग के लॉट में किया गया था। जिसमें छग नेचुरल रिसोर्सेस प्रालि कंपनी ने सफलता पाई थी। यह कंपनी भी अडाणी समूह की ही एक कंपनी बताई जा रही है, जो 2019 में अस्तित्व में आई थी। अंबुजा सीमेंट्स का अधिग्रहण भी अडाणी समूह ने किया था। अब अंबुजा सीमेंट्स के लिए पुरुंगा अंडरग्राउंड कोल ब्लॉक का उपयोग किया जाएगा। छग नेचुरल रिसोर्सेस से अंबुजा सीमेंट को ओनरशिप ट्रांसफर की गई है।
छाल तहसील के कोकदार, तेंदुमुड़ी, पुरुंगा और सामरसिंघा गांव की 870 हेक्टेयर भूमि इस माइंस के लिए अधिग्रहित की जानी है। सालाना 2.25 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य इस माइंस के लिए तय किया गया है। पर्यावरणीय सम्मति के लिए 11 नवंबर को इसकी जनसुनवाई पुरुंगा में रखी जा रही है। यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है जहां हाथियों की आवाजाही पूरे साल होती है।
621 हेक्टेयर वन भूमि, बाकी निजी
पुरुंगा में अंडरग्राउंड माइनिंग के जरिए कोयला निकाला जाएगा। कुल 869 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। इसमें से 621.33 हे. वन भूमि, 26.89 हे. शासकीय भूमि और 220 हे. वन भूमि है। इससे निकाला गया कोयला दूसरी कंपनियों को बेचा जाएगा। करीब 1000 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।



