धरमजयगढ़ में आबकारी कार्यालय के पास जमीन पर नशे में रेंग रहें शराबी, उप-निरीक्षक और आरक्षक के आँखों में पट्टी….

धरमजयगढ़ :- नगर की आबकारी व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। धरमजयगढ़ शराब दुकान के बाहर का नजारा शासन के नियमों को मुंह चिढ़ा रहा है। यहाँ शराब ठेके तों दूर की बात आबकारी कार्यालय के 10-20 मीटर के अंदर ही महज कुछ ही दूरी पर दो अलग-अलग जगहों पर चार युवक नशे में इस कदर धुत पाए गए कि वे जमीन पर लथपथ पड़े रहे। इस पूरी अव्यवस्था के केंद्र में क्षेत्र के आबकारी उप-निरीक्षक (Sub-Inspector) की कार्यप्रणाली है, जिनकी कथित लापरवाही और चुप्पी के कारण यह क्षेत्र नशेड़ियों का सुरक्षित चारागाह बन गया है।

कुंभकर्णी नींद में आबकारी विभाग
नियमानुसार, शराब दुकान के आसपास सार्वजनिक स्थल पर नशा करना और चखना दुकान संचालित करना सख्त मना है। लेकिन धरमजयगढ़ में उप-निरीक्षक की नाक के नीचे सारे नियम ताक पर रखे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि आबकारी उप-निरीक्षक द्वारा दुकान का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता, जिस कारण यहां ना तों कोई आरक्षक दिखाई पड़ते है ना ही उप-निरक्षक साहब। सड़कों पर पड़े बेसुध लोग इस बात का प्रमाण हैं कि क्षेत्र में ‘आबकारी एक्ट’ केवल कागजों तक सीमित है।
लापरवाही के मुख्य बिंदु
उप-निरीक्षक की जिम्मेदारी है कि वे दुकान के बाहर सार्वजनिक जमावड़े और अवैध नशे पर अंकुश लगाएं, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे हैं। दुकान के मुहाने पर ही लोगों का नशे में गिरना बताता है कि विभाग का कोई खौफ नहीं रह गया है।
सड़कों पर पसरी अराजकता
जो तस्वीर सामने आई, वह विचलित करने वाली है । शराब दुकान के बाहर दो अलग-अलग स्थानों पर चार व्यक्ति बेहोशी की हालत में जमीन पर पड़े थे। राहगीरों को उनके पास से गुजरने में भारी परेशानी हुई, लेकिन आबकारी अमला मौके से नदारद रहा। सवाल यह उठता है कि क्या उप-निरीक्षक केवल कागजी खानापूर्ति और राजस्व वसूली के लिए ही नियुक्त हैं? “जब सड़कों पर लोग इस तरह बेसुध पड़े हैं, तो आबकारी उप-निरीक्षक अपनी रिपोर्ट में ‘सब ठीक’ कैसे दिखा देते हैं? क्या उन्हें यह अराजकता नजर नहीं आती या वे इसे देखना नहीं चाहते?”
होगी उच्च स्तरीय शिकायत?
इस मामले के बाद क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आबकारी विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला कलेक्टर से उक्त उप-निरीक्षक की कार्यशैली की जांच करने और उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग करने का मन बना लिया है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है
पूरे जिले में आबकारी एक्ट पर कार्यवाही पुलिस विभाग करते अखबारों में दिखाई पड़ रहे है वही आबकारी विभाग दूर दूर तक कही नजर नहीं आ रही है। आबकारी विभाग के जिला अधिकारी को जरूरत है अपने अधिकारियों को धरातल पर कार्यवाही करने भेजने के लिए, जिला या फिर कार्यालय में बैठकर कार्यवाही नहीं हो सकती।
वही अगर धरमजयगढ़ की बात करे तो अधिकारी…….



