छाल स्थित आर.के.एस. कंपनी में मजदूरों का बढ़ा आक्रोश; गुंडागर्दी और अवैध वसूली के खिलाफ जांच शुरू..

छाल/रायगढ़ : औद्योगिक क्षेत्र छाल में संचालित रामकृपाल कंस्ट्रक्शन (RKS) कंपनी इन दिनों विवादों के केंद्र में है। SECL छाल उपक्षेत्र के लात खदान में ओबी (OB) का कार्य कर रही इस कंपनी पर मजदूरों के शोषण, मारपीट और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई है कि न्याय न मिलने पर पीड़ित मजदूरों ने आत्मदाह तक की चेतावनी दे दी है।
खौफ के साये में कामगार: अवैध वसूली और मारपीट
स्थानीय मजदूरों का आरोप है कि कंपनी परिसर अब सुरक्षित कार्यस्थल के बजाय असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। पीड़ितों के अनुसार, यहाँ कुछ तथाकथित संगठनों और बाहरी तत्वों का बोलबाला है, जो मजदूरों से जबरन वसूली करते हैं। विरोध करने पर बेरहमी से मारपीट की जाती है।
मजदूरों ने दबी जुबान में बताया कि कंपनी प्रबंधन और इन तत्वों के बीच ‘गहरा तालमेल‘ है। आरोप है कि प्रबंधन अपनी खामियों को दबाने और मजदूरों की आवाज कुचलने के लिए इन गुंडों का सहारा ले रहा है।
प्रशासनिक दखल: तहसीलदार को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए और जिला कलेक्टर तक पहुंची शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया है।
जांच के आदेश: जिला प्रशासन ने छाल तहसीलदार को मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
कार्रवाई शुरू: राजस्व विभाग के अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मुआयना शुरू कर दिया है।
हड़कंप: प्रशासनिक सक्रियता बढ़ते ही कंपनी प्रबंधन और संबंधित संगठनों में खलबली मच गई है।
हक मांगने पर मिल रही ‘काम से निकालने’ की धमकी
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने पुलिस से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगाई, लेकिन अब उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां दी जा रही हैं। एक मजदूर ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया:
“हम यहाँ रोजी-रोटी कमाने आते हैं, पिटने नहीं। अगर शोषण के खिलाफ बोलने पर हमें काम से निकाला गया, तो हमारे पास आत्मदाह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।“
उठते सवाल?
- आखिर कंपनी परिसर में बाहरी और असामाजिक तत्वों का प्रवेश किसके शह पर हो रहा है?
- क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं?
- तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद क्या कंपनी प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई होगी?
अब क्षेत्र की नजरें तहसीलदार की रिपोर्ट और कलेक्टर के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या इन मजदूरों को ‘जंगलराज‘ से मुक्ति मिलेगी या रसूखदारों के आगे उनकी आवाज फिर दबा दी जाएगी?



