अधूरे निर्माण पर पूर्णता का ठप्पा, जिम्मेदारों पर कार्यवाही कब?

शौचालय नहीं, भ्रष्टाचार की इमारत—तीन लाख हुए बेकार
छाल। शासन की योजनाएं कागजों में भले ही आकर्षक दिखती हों, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इसके उलट नजर आती है। इसका ताजा उदाहरण नवापारा स्थित एसईसीएल आवासीय परिसर के बाहर जादौन घर के पास देखने को मिल रहा है, जहां जनता की सुविधा के लिए बनाया गया सार्वजनिक शौचालय आज बदहाली का शिकार बना हुआ है।
करीब तीन लाख रुपये की लागत से निर्मित इस शौचालय को कागजों में आठ महीने के भीतर पूर्ण घोषित कर दिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि निर्माण कार्य अब तक अधूरा पड़ा है और पिछले एक वर्ष से यह भवन उपयोग के बिना धूल फांक रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभाग इसे पूर्ण बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
यह निर्माण कार्य 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2023-24 में जनपद उपाध्यक्ष रमेश अग्रवाल की अनुशंसा पर कराया गया था। उद्देश्य क्षेत्र में संचालित दुकानों, बैंकों और आम नागरिकों को स्वच्छता की सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन निर्माण एजेंसी की लापरवाही ने इस योजना को विफल बना दिया।
🔴 खुले टैंक दे रहे हादसे को न्योता

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शौचालय के सेप्टिक टैंक के चैंबर अब भी खुले पड़े हैं। उन पर ढक्कन तक नहीं लगाया गया है, जिससे ये गहरे गड्ढे कभी भी राहगीरों या बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य अधूरा है, टैंक खुले हैं और शौचालय का उपयोग शुरू ही नहीं हुआ, तो आखिर किस आधार पर इसे पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया?
🔴 जनता के पैसे की बर्बादी

लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर है, जबकि यह सरकारी भवन अनुपयोगी पड़ा हुआ है। यह स्थिति न केवल सरकारी धन की बर्बादी को दर्शाती है, बल्कि निर्माण एजेंसी की लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब संज्ञान लेता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्यवाही की जाएगी।



