बिना अधिग्रहण किसान की जमीन पर कब्जा, SECL और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

“कोयले की कालिख में दबा अन्नदाता का हक: आदिवासी किसान की जमीन पर कंपनी ने खड़ा किया मिट्टी का पहाड़”
छाल । रायगढ़ जिले का छाल क्षेत्र इन दिनों विकास की नहीं बल्कि विनाश और तानाशाही की कहानी बयां कर रहा है। जिसे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, वही किसान आज अपनी ही जमीन बचाने के लिए दफ्तरों की चौखट पर भटकने को मजबूर है।
मामला छाल क्षेत्र के ग्राम चंद्रशेखरपुर का है, जहां एक आदिवासी किसान जय कुमार राठिया की कृषि भूमि पर सुनील कुमार अग्रवाल की एसकेए कंपनी द्वारा कथित रूप से जबरन कब्जा कर मिट्टी का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार किसान की खसरा नंबर 116/1 की भूमि का न तो कोई विधिवत अधिग्रहण किया गया है और न ही उसे किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया है। इसके बावजूद एसईसीएल से अनुबंध का हवाला देते हुए कंपनी ने जमीन पर मिट्टी का ढेर लगा दिया।
पीड़ित किसान ने जब इसका विरोध किया तो उसे न्याय देने के बजाय सत्ता के रसूख का हवाला देकर चुप कराने की कोशिश की गई।

पेसा एक्ट पर सवाल
रायगढ़ जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां पेसा कानून लागू है। यह कानून ग्राम सभा और आदिवासियों को उनकी जल, जंगल और जमीन पर सर्वोच्च अधिकार देता है। लेकिन यहां स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद एक आदिवासी किसान अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए भटक रहा है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है या फिर रसूखदार ठेकेदारों के सामने प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं।
कंपनी और प्रशासन की जुगलबंदी के आरोप
पीड़ित जय कुमार राठिया का कहना है कि बिना अधिग्रहण के निजी जमीन का उपयोग करना और विरोध करने पर धमकी देना सीधे तौर पर मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का हनन है। वहीं अब तक इस मामले में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाना कंपनी और प्रशासन की कथित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

पीड़ित किसान का कहना है कि यदि जल्द ही उसकी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया गया और उसे न्याय नहीं मिला, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केवल चुनावी वादा बनकर रह गया है और हकीकत में गरीब आदिवासी किसान आज भी रसूखदारों के दबाव में पिस रहा है।
इस संबंध में खनन प्रबंधन से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।



