“स्वच्छता अभियान को ठेंगा: महावीर एनर्जी ने सामुदायिक शौचालय के सामने लगाया राख का अंबार”

“विधानसभा में फ्लाइ ऐश पर बहस, गांव में महावीर एनर्जी की मनमानी जारी”
छाल। एक ओर राजधानी में विधानसभा के भीतर उद्योगों से निकलने वाली राख (फ्लाइ ऐश) और उससे फैल रहे धीमे जहर को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो रही है, मानो समस्या का समाधान जल्द निकलने वाला हो। लेकिन जमीनी हकीकत इन बहसों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है।
घरघोड़ा क्षेत्र स्थित महावीर एनर्जी प्लांट पर नियमों को ताक पर रखकर मनमानी करने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्लांट प्रबंधन ने भेंगारी पंचायत में बने सामुदायिक शौचालय के ठीक सामने महीनों पहले फ्लाइ ऐश का अंबार लगा दिया है। हालत यह है कि शौचालय के दरवाजे तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के लिए स्वच्छता और सुविधा के उद्देश्य से बनाए गए इस शौचालय की स्थिति अब उलट हो चुकी है। उद्योग की लापरवाही के कारण यह स्थान अब गंदगी और बीमारियों का केंद्र बनने लगा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग प्रबंधन को न तो शासन का डर है और न ही प्रशासन का। फ्लाइ ऐश के निपटान को लेकर बने कड़े नियमों की अनदेखी करते हुए आबादी वाले क्षेत्रों और सार्वजनिक संपत्तियों के आसपास राख फेंकी जा रही है। इससे क्षेत्र के लोग महीनों से धूल और प्रदूषण के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या विधानसभा की बहस केवल भाषणों और कागजों तक सीमित रह जाएगी, जबकि जमीनी स्तर पर महावीर एनर्जी जैसे उद्योग ग्रामीणों की सेहत और जनहित को नजरअंदाज करते रहेंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कब संज्ञान लेता है या फिर उद्योग की राख के नीचे जनहित ही दबकर रह जाएगा।



