सड़क किनारे जहर: कटंगडीह में खुलेआम फ्लाई ऐश डंपिंग, जिम्मेदार बेखबर

रायगढ़ बना ‘सफेद जहर’ का अड्डा: उद्योगों की मनमानी के आगे बेबस पंचायत
छाल :- लोकतंत्र में जिसे ग्राम सरकार या पंचायत कहा जाता है रायगढ़ के उद्योगों ने शायद उसे कागजों का खिलौना समझ लिया है। धरमजयगढ़ घरघोड़ा और छाल क्षेत्र के ग्रामीण आज उद्योगों की तानाशाही और प्रदूषण के दोहरे वार झेल रहे हैं। एनजीटी के सख्त निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम फ्लाई ऐश का निपटान किया जा रहा है जो हजारों लोगों की सांसों में धीमा जहर बनकर घुल रहा है।
देखिए किस तरह बिना अनुमति के प्लांटों के फ्लाई ऐश खुले में डालकर खफाया जा रहा। जानकारी तो सभी जिम्मेदारों को पर कोई भी संज्ञान लेने को इच्छुक नहीं।
कटंगडीह में तानाशाही सरपंच पति की आपत्ति को कचरा समझाताजा मामला घरघोड़ा के कटंगडीह का है जिसने उद्योग प्रबंधनों के अहंकार की कलई खोल दी है। सपंच पति हरिचरण ने गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि यहाँ सन स्टील प्लांट से निकलने वाली राख को नीलो गुप्ता नामक व्यक्ति द्वारा सड़क किनारे बेधड़क पाटा जा रहा है। हद तो तब हो गई जब गांव के सरपंच पति ने इस अवैध डंपिंग का विरोध किया लेकिन प्रबंधन ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। बिना पंचायत की एनओसी या अनुमति के सार्वजनिक स्थल पर राख डालना यह साबित करता है कि अब उद्योगों के लिए नियम कानून मायने नहीं रखते।
फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक निपटान करना उद्योगों की जिम्मेदारी है लेकिन परिवहन के खर्च को बचाने और निजी लाभ के चक्कर में इसे खेतों और सड़कों के किनारे डंप किया जा रहा है।बार बार समाचार प्रकाशित होने के बाद भी जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग की खामोशी कई सवाल खड़े करती है। क्या अधिकारियों की साठगांठ उद्योगों के साथ इतनी गहरी है कि उन्हें उड़ती राख दिखाई नहीं देती। क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग की होड़ लगी है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की आंखों पर मानों राख की पट्टी बंधी हुई है।
एनजीटी के नियमों का कब्रिस्तान बना रायगढ़:- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्पष्ट आदेश हैं कि फ्लाई ऐश का निपटान आबादी से दूर और निर्धारित मानकों के तहत होना चाहिए। लेकिन रायगढ़ के इन इलाकों में एनजीटी की गाइडलाइंस का जनाजा निकाला जा रहा है। यदि यही आलम रहा तो आने वाले समय में यह क्षेत्र लाइलाज बीमारियों का केंद्र बन जाएगा।



