“महारत्न कंपनी का दौरा बना दिखावा, जनता रही बेबस”
महारत्न कंपनी का तमाशा: चेयरमैन की आवभगत में डूबा प्रबंधन, जनता के दर्द पर फेरा पानी
रायगढ़ :- जिले के छाल उपक्षेत्र में आज उस समय विरोधाभासी तस्वीर देखने को मिली, जब कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी. साईराम के दौरे ने स्थानीय जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। एक ओर खदानों और साइलो का निरीक्षण कर उत्पादन और उपलब्धियों की सराहना की गई, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की जमीनी समस्याएं अनसुनी रह गईं।

निरीक्षण में ‘सब चंगा’, जमीनी हकीकत अलग
सुबह रेलवे मार्ग से छाल पहुंचे चेयरमैन के स्वागत में पूरा प्रबंधन जुटा रहा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अधिकारियों ने 6 मिलियन टन उत्पादन लक्ष्य और ऊर्जा क्षेत्र में योगदान को बड़ी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपाई। ठेका कंपनी के कार्यों की भी सराहना की गई।
लेकिन जिस जमीन से कोयला निकाला जा रहा है, वहीं के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं—सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा—के लिए जूझ रहे हैं।
जनता और मीडिया से दूरी
स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि चेयरमैन के सामने वे अपनी समस्याएं रख पाएंगे। मगर प्रबंधन ने कड़ी सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर ऐसी घेराबंदी की कि आम जनता और मीडिया को उनसे मिलने का मौका ही नहीं दिया गया।
जब मीडिया ने ज्वलंत मुद्दों पर सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्हें चेयरमैन से दूर ही रखा गया। इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या दौरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया?
कागजों में विकास, जमीनी स्तर पर अभाव
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि:
- सड़कों की हालत जर्जर है
- पानी प्रदूषित है
- स्वास्थ्य सुविधाएं नाममात्र की हैं
- शिक्षा व्यवस्था कमजोर है
दौरे के दौरान कुछ समय के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त जरूर दिखीं, लेकिन स्थायी समस्याओं पर कोई ठोस पहल नजर नहीं आई।
बड़ा सवाल: विकास किसके लिए?
आज का यह हाई-प्रोफाइल दौरा कई सवाल छोड़ गया है—क्या प्रभावित क्षेत्र की जनता केवल संसाधन देने के लिए है? क्या उत्पादन ही प्राथमिकता है और इंसानियत पीछे छूट गई है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कंपनी केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देगी और प्रभावितों की समस्याओं को नजरअंदाज करेगी, तो यह विकास नहीं बल्कि विनाश का संकेत होगा।
छाल क्षेत्र में चेयरमैन का यह दौरा उपलब्धियों के प्रदर्शन तक सीमित रह गया, जबकि जनता की उम्मीदें अधूरी रह गईं। अब देखना होगा कि प्रबंधन जमीनी हकीकत को स्वीकार कर सुधार की दिशा में कदम उठाता है या नहीं।



