वैश्विक संकट की मार: छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों पर ब्रेक, BAI ने मांगा राहत पैकेज

रायपुर/छत्तीसगढ़: वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध के प्रभाव अब भारत के निर्माण क्षेत्र में भी साफ दिखाई देने लगे हैं। Builders Association of India (BAI) छत्तीसगढ़ इकाई ने जल संसाधन विभाग, नवा रायपुर को एक विस्तृत पत्र भेजकर निर्माण कार्यों में आ रही गंभीर बाधाओं की जानकारी दी है और तत्काल राहत पैकेज की मांग की है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रूपेश कुमार सिंघल ने बताया कि पिछले एक महीने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण पेट्रोलियम उत्पादों और निर्माण सामग्रियों की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ में चल रहे निर्माण कार्यों पर पड़ा है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि डीजल, लाइट डीजल ऑयल (LDO), बिटुमेन, इमल्शन सहित अन्य पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की कीमतें अनुमानित सीमाओं से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। इसके अलावा स्टील और सीमेंट जैसी आवश्यक सामग्रियों के दामों में भी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। ईंधन की अनियमित उपलब्धता के कारण मशीनरी और उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे परियोजनाओं की गति काफी धीमी पड़ गई है।
एसोसिएशन ने यह भी बताया कि बिटुमेन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है और रिफाइनरियां मांग के अनुरूप उत्पादन देने में असमर्थ हैं। वहीं, विभिन्न राज्यों में चुनावों के चलते श्रमिकों की कमी भी एक बड़ी समस्या बन गई है, जिससे निर्माण कार्य लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
BAI ने इन परिस्थितियों को ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर बताते हुए इसे “वास्तविक बाधा (हिंड्रेंस)” करार दिया है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित अवधि के लिए बिना किसी दंड के समय वृद्धि (EOT) प्रदान की जाए और बढ़ी हुई लागत के लिए अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए।
साथ ही, जिन अनुबंधों में मूल्य वृद्धि (एस्केलेशन) का प्रावधान नहीं है, उनमें भी “फोर्स मेज्योर” के तहत राहत देने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से शीघ्र राहत पैकेज जारी करने का आग्रह किया है, ताकि निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता बनी रह सके।
इस संबंध में पत्र की प्रतियां Narendra Modi सहित केंद्रीय मंत्रियों और छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।



