अडानी कोल ब्लॉक की आहट से फिर गरमाया माहौल, ग्रामीणों ने शुरू की आंदोलन की तैयारी

धरमजयगढ़ :- उद्योगपतियों की नजर और आदिवासियों-ग्रामीणों की जमीन के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर पुरूँगा क्षेत्र में उबाल लेने लगा है। अडानी कोल ब्लॉक परियोजना की संभावित जनसुनवाई को लेकर लंबे समय से शांत दिख रही पुरूँगा की धरती पर विरोध की चिंगारी फिर भड़कती नजर आ रही है। प्रभावित गांवों में अडानी समूह के प्रतिनिधियों और उनके स्थानीय सहयोगियों की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव-गांव में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।
जब कड़ाके की ठंड में झुकना पड़ा था प्रशासन को
पुरूँगा वही क्षेत्र है, जहां कुछ माह पूर्व ग्रामीणों ने अडानी समूह की प्रस्तावित जनसुनवाई का जोरदार विरोध किया था। अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे तक कड़ाके की ठंड में महीनों खुले आसमान के नीचे धरने पर डटे रहे थे। ग्रामीणों के अटूट संकल्प और एकजुटता के आगे प्रशासनिक अमला भी दबाव में आ गया था। अंततः जनसुनवाई की प्रक्रिया को निर्धारित अवधि के लिए स्थगित करना पड़ा था, जिसे ग्रामीण अपनी बड़ी जीत मानते हैं।
बढ़ी चहलकदमी, बढ़ी आशंकाएं
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना को लेकर कंपनी ने अपने प्रयास बंद नहीं किए हैं। पिछले कुछ दिनों से पुरूँगा और आसपास के प्रभावित गांवों में कंपनी के अधिकारियों तथा स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। इस गतिविधि ने ग्रामीणों की पुरानी आशंकाओं को फिर जगा दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार संपर्क और बैठकों का सिलसिला चल रहा है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसी आशंका को देखते हुए विभिन्न गांवों में छोटी-बड़ी बैठकों का आयोजन शुरू हो गया है। ग्रामीण संगठन भी सक्रिय हो गए हैं और आगामी रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।
‘जल, जंगल और जमीन’ की लड़ाई में आर-पार का संकेत
जमीनी हालात बताते हैं कि इस बार ग्रामीण पहले से अधिक सतर्क और मुखर हैं। उनका कहना है कि उनकी सहमति के बिना जनसुनवाई या भूमि अधिग्रहण की किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया तो व्यापक विरोध किया जाएगा।
ग्रामीणों का दावा है कि पिछली बार की तरह आंदोलन केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। क्षेत्र में चल रही बैठकों और बढ़ती सक्रियता से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में पुरूँगा एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बन सकता है।
नजरें प्रशासन और कंपनी की अगली रणनीति पर
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन पिछली परिस्थितियों से सबक लेते हुए संवाद और सहमति का रास्ता अपनाएगा, या फिर जनसुनवाई और परियोजना को लेकर बढ़ती हलचल क्षेत्र में नए टकराव की स्थिति पैदा करेगी। फिलहाल अडानी समूह के प्रतिनिधियों की बढ़ी गतिविधियों ने ग्रामीण इलाकों में हलचल तेज कर दी है और लोग आने वाले दिनों पर नजरें टिकाए हुए हैं।



