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दुर्गापुर कोल परियोजना अटकी, ग्रामीणों की मांगों के आगे ड्रोन सर्वे पर लगी मौखिक रोक

ड्रोन सर्वे पर ब्रेक, दुर्गापुर कोल परियोजना पर बढ़ी अनिश्चितता

धरमजयगढ़। प्रस्तावित दुर्गापुर कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास, वनाधिकार और सर्वे प्रक्रिया को लेकर बुधवार को प्रभावित ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने पहले रायगढ़ स्थित SECL के महाप्रबंधक (GM) से और बाद में जिला कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बावजूद किसी भी प्रमुख मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।

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करीब 50 ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल में अनिल सरकार, भरत साहू, हेम पटेल, दिलीप मिश्रा सहित कई प्रभावित गांवों के प्रतिनिधि शामिल रहे। ग्रामीणों की ओर से शिक्षक आशीष विश्वास ने पक्ष रखते हुए कहा कि जब तक उचित मुआवजा, पुनर्वास नीति, ग्रामसभा की सहमति, वनाधिकार और आजीविका की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट लिखित जानकारी नहीं दी जाती, तब तक परियोजना की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए।

समान कोयला, फिर मुआवजे में अंतर क्यों..?

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब जमीन के नीचे मौजूद कोयले का मूल्य समान है, तो अलग-अलग गांवों की कृषि भूमि के मुआवजे में लाखों रुपये का अंतर क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने सभी प्रभावित गांवों के लिए समान और न्यायसंगत मुआवजा नीति लागू करने की मांग की।

ड्रोन सर्वे में देरी से बढ़ी चिंता

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि ड्रोन सर्वे में लगातार हो रही देरी के कारण अब GPS आधारित सर्वे की संभावना बन रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि पुराने उपग्रह चित्रों या पुराने रिकॉर्ड के आधार पर सर्वे किया गया तो हाल के वर्षों में बने मकान और अन्य निर्माण मुआवजा निर्धारण से बाहर रह सकते हैं, जिससे प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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हालांकि, इस संबंध में SECL अथवा जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अवैध निर्माण को लेकर भी चिंता

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि सर्वे में लगातार देरी होती रही और इस दौरान बड़े पैमाने पर नए निर्माण हुए, तो बाद में वास्तविक पात्र हितग्राहियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। बैठक में लोगों से अवैध निर्माण का विरोध करने और पारदर्शी सर्वे प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की गई।

बैठक के दौरान ग्रामीणों द्वारा पूछे गए प्रमुख सवालों पर SECL के महाप्रबंधक ने कहा

● सवाल: सभी गांवों को समान मुआवजा क्यों नहीं? जवाब: यह मेरे अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। इसका निर्णय उच्च स्तर पर होता है।

● सवाल: नक्शे में दुर्गापुर गांव की करीब 20 एकड़ जमीन छोड़ी गई है। जवाब: यदि ऐसा है तो इसकी जांच कर उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।

● सवाल: वनाधिकार पट्टा धारकों को मुआवजा मिलेगा या नहीं?जवाब: यदि वनाधिकार पट्टा वर्ष 2016 से पहले मिला है तो मुआवजा दिया जाएगा।

● सवाल: जिनके पास बेजाकब्जा है लेकिन जमीन उनके नाम नहीं है, उन्हें क्या लाभ मिलेगा? जवाब: ऐसे लोगों को केवल मकान का मुआवजा मिलेगा, जमीन का नहीं।

● सवाल: शाहपुर गांव की पूरी जमीन अधिग्रहित की जाए। जवाब: पहले यह जांच होगी कि पूरा क्षेत्र कोल बेयरिंग एरिया में आता है या नहीं, उसके बाद आगे की प्रक्रिया होगी।

● सवाल: धरमजयगढ़ कॉलोनी की लगभग 80 एकड़ भूमि पर आबादी पट्टा नहीं है। जवाब: यदि धारा-9 की प्रक्रिया से पहले भूस्वामी अधिकार प्राप्त है तो मुआवजा दिया जाएगा।

कलेक्टर ने ड्रोन सर्वे पर लगाई मौखिक रोक

ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में जिला प्रशासन की सहमति के बाद SECL द्वारा 29 जून 2026को ड्रोन सर्वे प्रस्तावित था, लेकिन वह शुरू नहीं हो सका। इसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुलाकात की।

ग्रामीणों के अनुसार, रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने चर्चा के दौरान स्पष्ट कहा कि जब तक SECL प्रभावित परिवारों को लिखित रूप में यह नहीं बताता कि उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा तथा पुनर्वास कहां दिया जाएगा, तब तक ड्रोन सर्वे नहीं कराया जाएगा। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक लिखित आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है।

परियोजना में देरी का असर

जानकारों का मानना है कि किसी भी खनन परियोजना को शुरू करने की प्रक्रिया लंबी होती है। यदि सर्वे और प्रारंभिक कार्यों में लगातार विलंब होता है, तो पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है। बताया जा रहा है कि दुर्गापुर कोल ब्लॉक परियोजना पहले ही लगभग 15 वर्षों की देरी का सामना कर रही है। ऐसे में लंबे समय तक प्रक्रिया रुकी रहने का प्रभाव परियोजना के साथ-साथ प्रभावित परिवारों पर भी पड़ सकता है।

अब अगले फैसले का इंतजार

फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें SECL और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा, पुनर्वास, वनाधिकार और आजीविका से जुड़े सभी मुद्दों का संतोषजनक समाधान होने के बाद ही परियोजना की आगे की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। वहीं प्रशासन और SECL के अगले निर्णय से यह तय होगा कि ड्रोन सर्वे, भूमि अधिग्रहण और दुर्गापुर कोल ब्लॉक परियोजना की दिशा क्या होगी।

क्षेत्र के युवा बेरोजगारों और आम नागरिकों के मन में एक बड़ा सवाल है। आखिर कब तक व्यक्तिगत स्वार्थ और राजनीतिक विरोध के कारण धरमजयगढ़ क्षेत्र का विकास प्रभावित होता रहेगा? अगर कोयला खदान खुलता है तो जल्द हमे रोजगार मिलेगा जिससे हमारे आनेवाले पीढ़ी का भविष्य सुधरेगा।

Niraj Biswas

नीरज विश्वास, सीजी चौपाल न्यूज़ . पता - रायगढ़ , छत्तीसगढ़ मो . 8818972003

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