मतदान से पहले उपसरपंच राजीव डनसेना की गिरफ्तारी से गरमाया था मामला, अब नए सरपंच के चुनाव की तैयारी


रायगढ़। ग्राम पंचायत तारापुर में पिछले कई दिनों से चल रहा राजनीतिक और पंचायत स्तरीय विवाद आखिरकार अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया। उपसरपंच राजीव डनसेना सहित आठ पंचों द्वारा सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मतदान के बाद पारित हो गया। इसके साथ ही डिग्री लाल सिदार को सरपंच पद से हटा दिया गया है। अब पंचायत में नए सरपंच के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।

हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव से लेकर मतदान तक का पूरा घटनाक्रम विवादों से घिरा रहा। कार्रवाई में देरी के आरोपों के बाद मामला कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचा, वहीं मतदान से ठीक पहले उपसरपंच राजीव डनसेना की गिरफ्तारी ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बना दिया।
कार्रवाई में देरी को लेकर पंचों ने उठाई आवाज
जानकारी के अनुसार, उपसरपंच राजीव डनसेना और पंचायत के आठ पंचों ने सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। प्रस्ताव एसडीएम के समक्ष पेश किए जाने के बाद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप प्रस्ताव लाने वाले पंचों और उपसरपंच ने लगाया।
कार्रवाई में कथित देरी से नाराज होकर वे कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और अविश्वास प्रस्ताव पर जल्द प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की। इसके बाद प्रशासन ने 10 तारीख को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तारीख निर्धारित की।

मतदान से पहले उपसरपंच की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
मतदान की तारीख नजदीक आते ही मामले ने अचानक नया मोड़ ले लिया। जन्माष्टमी से एक दिन पहले, 3 तारीख की रात , कोतरा रोड थाना पुलिस ने उपसरपंच राजीव डनसेना को थाने ले जाकर गिरफ्तार कर लिया।
बताया गया कि सरपंच डिग्री लाल सिदार की शिकायत के आधार पर राजीव डनसेना के खिलाफ जातिगत गाली-गलौच के आरोप में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया। उनके साथ पंचायत के एक पंच की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई।
गिरफ्तारी के बाद राजीव डनसेना को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उन्हें कई दिनों तक जेल में रहना पड़ा।
गिरफ्तारी के विरोध में थाने पहुंचे ग्रामीण
राजीव डनसेना की गिरफ्तारी की जानकारी तारापुर में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके समर्थन में कोतरा रोड थाना पहुंच गए। ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खरसिया क्षेत्र के कांग्रेस विधायक उमेश पटेल सहित कांग्रेस के कई नेता भी थाने पहुंचे। समर्थकों और नेताओं की मौजूदगी के कारण थाना परिसर के बाहर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा।
बाद में समझाइश और बातचीत के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया।
समर्थकों ने लगाए द्वेषवश फंसाने के आरोप
राजीव डनसेना के समर्थक ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरपंच डिग्री लाल सिदार के साथ किसी प्रकार की जातिगत गाली-गलौच नहीं की थी। उनका दावा था कि पंचायत के भीतर चल रहे विवाद और अविश्वास प्रस्ताव के चलते राजीव डनसेना को द्वेषवश एससी-एसटी एक्ट के मामले में फंसाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
जेल से बाहर आने के बाद अविश्वास प्रस्ताव में मिली जीत
जमानत मिलने के बाद राजीव डनसेना गांव लौटे। इसके अगले ही दिन ग्राम पंचायत तारापुर में सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान हुआ।
मतदान में अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने वाले राजीव डनसेना सहित आठों पंचों को जीत मिली। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के साथ ही सरपंच डिग्री लाल सिदार को पद से हटा दिया गया।
राजीव डनसेना बोले- यह पूरे गांव की जीत
अविश्वास प्रस्ताव में जीत के बाद उपसरपंच राजीव डनसेना ने इसे व्यक्तिगत जीत के बजाय पूरे गांव की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत तारापुर के ग्रामीणों, उनके साथ खड़े आठ पंचों और पूरे गांव के संघर्ष की जीत है।
राजीव डनसेना ने कहा कि अब उनका ध्यान पंचायत के विकास पर रहेगा। उन्होंने गांव की समस्याओं के समाधान, विकास कार्यों में तेजी और तारापुर के चौमुखी विकास की दिशा में काम करने की बात कही।
अब नए सरपंच के चुनाव पर टिकी नजर
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अब ग्राम पंचायत तारापुर में नए सरपंच के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। चुनाव की आधिकारिक घोषणा और आगे की प्रक्रिया प्रशासन द्वारा निर्धारित की जाएगी।
तारापुर में बदले पंचायत के राजनीतिक समीकरण के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नया सरपंच कौन होगा और नई पंचायत व्यवस्था गांव के विकास को किस दिशा में आगे ले जाएगी।
अविश्वास प्रस्ताव से पहले की राजनीतिक खींचतान, मतदान से ठीक पहले हुई गिरफ्तारी और इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव का पारित होना—इन घटनाक्रमों ने तारापुर पंचायत को क्षेत्र की चर्चित पंचायत राजनीति के केंद्र में ला दिया है।



