शासकीय जमीन का निजी इस्तेमाल? कॉलोनी बसाकर किराया वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप


छाल। छाल तहसील अंतर्गत ग्राम छाल में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण कर कॉलोनी बसाने और वहां से किराया वसूलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक शासकीय शिक्षक द्वारा शासकीय भूमि का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम छाल में करीब 0.6600 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर कॉलोनी विकसित की गई है। आरोप है कि इस कॉलोनी में बनाए गए मकानों को किराए पर देकर संबंधित व्यक्ति द्वारा हर महीने हजारों रुपये की आय अर्जित की जा रही है।
वहीं, कॉलोनी से कुछ दूरी पर 0.5700 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर शेडनुमा मकान बनाकर भूमि का उपयोग खेती के लिए किए जाने का भी आरोप है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो शासकीय भूमि के संरक्षण और उसके अवैध उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

शासकीय कर्मचारी पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित व्यक्ति शासकीय सेवा में शिक्षक के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है, तो उसके द्वारा कथित रूप से शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसका निजी उपयोग कैसे किया जा रहा है? क्या संबंधित विभाग और राजस्व अधिकारियों को इसकी जानकारी है? यदि जानकारी है तो अब तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
स्थानीय स्तर पर इस मामले की राजस्व विभाग द्वारा स्थल जांच, भूमि अभिलेखों की जांच तथा कथित अतिक्रमण की पैमाइश कराए जाने की मांग उठ रही है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि शासकीय भूमि पर निर्माण किस आधार पर किया गया और वहां से किराया वसूले जाने की स्थिति में उसकी वैधता क्या है।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में निष्पक्ष जांच के बाद यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और उसके व्यावसायिक उपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने के साथ संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासकीय भूमि की सुरक्षा के लिए प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच करनी चाहिए।



