नियुक्त नोटरी अधिवक्ताओं ने कहा—बेवजह की गई याचिका से हुई मानसिक प्रताड़ना, मानहानि का मामला दर्ज कराने की तैयारी


नोटरी नियुक्ति के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज
धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा वर्ष 2025 में प्रदेशभर में नोटरी पदों पर शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार नियुक्तियां की गई थीं। इसी क्रम में रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील एवं कापू तहसील के लिए दो-दो अधिवक्ताओं का नोटरी पद पर चयन कर नियुक्ति प्रदान की गई।

धरमजयगढ़ तहसील के लिए हेमप्रसाद पटेल एवं लालू ठाकुर, जबकि कापू तहसील के लिए विवेकानंद शुक्ला एवं पिंटू प्रसाद सोनी को नोटरी पद पर नियुक्त किया गया।
इन नियुक्तियों के विरुद्ध अधिवक्ता मनोज डनसेना एवं सुशांत कुमार दत्ता द्वारा न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। नियुक्त नोटरी अधिवक्ताओं के अनुसार, उक्त याचिका को पहले उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जहां से याचिका खारिज हुई। इसके बाद मामले को उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी चुनौती दी गई, लेकिन वहां से भी याचिका खारिज होने के बाद नोटरी नियुक्तियों को लेकर चल रही न्यायिक चुनौती समाप्त हो गई।

याचिका खारिज होने के बाद नियुक्त नोटरी अधिवक्ताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके अनुसार बिना उचित आधार के उनकी नियुक्ति को चुनौती देने से उन्हें मानसिक परेशानी एवं सामाजिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटरी पद की नियुक्ति को निरस्त कराने के उद्देश्य से दुर्भावना एवं ईर्ष्या के चलते न्यायालय का सहारा लिया गया।
नियुक्त अधिवक्ताओं ने कहा कि इस पूरे मामले से उन्हें हुई कथित मानसिक प्रताड़ना को लेकर वे अधिवक्ता मनोज डनसेना एवं सुशांत कुमार दत्ता के विरुद्ध मानहानि एवं मानसिक प्रताड़ना से संबंधित कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं तथा न्यायालय में मामला दायर किया जाएगा।
नोटरी नियुक्त अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालयों में मिली राहत से यह स्पष्ट हुआ है कि उनकी नियुक्ति शासन के नियमों के अनुरूप हुई है। उन्होंने इसे “सत्य की जीत” बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विराम लगा है।



