कोयले की कालिख और प्रशासन की ‘सफेद’ होली!

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ के जंगलों में तो बिना रंग-गुलाल के ही ‘काला उत्सव’ मनाया जा रहा है। यहाँ राजस्व और वन विभाग के बीच तालमेल का ऐसा ‘फाग’ चल रहा है कि जनता भी कन्फ्यूज है कि असली खिलाड़ी कौन है।
😴 अधिकारी की ‘कुंभकर्णी’ नींद और जिम्मेदारी का फुटबॉल
पत्रकारों ने जब इस काले कारोबार का भंडाफोड़ किया, तो प्रशासन ऐसी गहरी नींद से जागा जैसे किसी ने भांग ज्यादा पी ली हो। राजस्व अधिकारी ने तो बड़े प्रेम से जिम्मेदारी का गुलाल वन विभाग के गालों पर मल दिया। खनिज अधिकारी को भी जगाया गया, पर ऐसा लगता है कि नेताओं के ‘राजनैतिक पिचकारी‘ के दबाव में कार्रवाई की धार ही फीकी पड़ गई।
🚜 ‘गरीब’ तस्कर और डीजल का धोखा
ताजा मामला बोरो और संगरा के जंगलों का है। यहाँ एक तस्कर का ट्रैक्टर क्या पकड़ाया, तस्करों की ‘गरीबी’ का सरेआम मजाक उड़ गया। खबर है कि ट्रैक्टर इसलिए रुका क्योंकि उसका डीजल खत्म हो गया था। अब सोचिए, टनों कोयला डकारने वालों के पास ट्रैक्टर में डालने का तेल नहीं बचा?
ये तो वही बात हुई— “कोयला की दलाली में हाथ काले, और ट्रैक्टर के टैंक खाली!”
📉 खानापूर्ति की होली: 54 टन का ‘टिका’जंगलों में अभी भी टनों कोयला लावारिस पड़ा है, जैसे होली के बाद सड़कों पर बचा हुआ कचरा। लेकिन हमारे जिम्मेदार अधिकारियों ने सिर्फ 54 टन कोयला थाने लाकर ऐसा ‘अभिषेक‘ लगाया है कि मानो पूरा भ्रष्टाचार ही साफ हो गया हो। बाकी बचा हुआ माल तस्कर धीरे-धीरे ‘प्रसाद’ की तरह बेचकर अपना नुकसान भर रहे हैं।
🔫 रेंजर को धमकी, सिस्टम को ‘मौन व्रत’
हद तो तब हो गई जब सूत्रों ने बताया कि तस्करों ने किसी रेंजर को “ऊपर पहुँचाने” की धमकी दे दी। लेकिन साहब! हमारे आला अधिकारी इस पर ऐसे मौन हैं जैसे कोई गहरा ध्यान लगा रहे हों। शायद उन्हें डर है कि अगर बोले, तो राजनैतिक गुलाल उनकी कुर्सी को न रंग दे।
धरमजयगढ़ में तस्कर मस्त हैं, अधिकारी सुस्त हैं और कानून के रक्षक ‘मौन व्रत’ में व्यस्त हैं। इस बार की होली में यहाँ रंग नहीं, कोयले की कालिख का बोलबाला है। हो.स.
बुरा न मानो होली है।



