वादाखिलाफी के घेरे में धरमजयगढ़ अध्यक्ष: ‘चुनावी घोषणा’ बनी ‘जुमला’, एक साल बाद भी बदहाल हैं बुनियादी सुविधाएं

धरमजयगढ़। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि वादे याद रखने के लिए नहीं, बल्कि चुनाव जीतने के लिए किए जाते हैं। धरमजयगढ़ नगर पंचायत में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। नगर पंचायत चुनाव के दौरान विकास की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त गिनाने वाले भाजपा समर्थित अध्यक्ष अनिल सरकार अब अपने ही वादों को लेकर सवालों के घेरे में हैं। कार्यकाल का एक वर्ष बीत जाने के बाद भी धरातल पर विकास की कोई ठोस तस्वीर नजर नहीं आ रही है।
"जीतते ही पहला काम मुक्तिधाम का तटबंध" -

चुनाव प्रचार के दौरान अनिल सरकार ने सार्वजनिक मंचों से यह पुरजोर घोषणा की थी कि जीत हासिल करने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता मुक्तिधाम तटबंध का निर्माण करना होगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि आज एक साल बाद भी मुक्तिधाम की स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश और कटाव के कारण तटबंध की जरूरत और बढ़ गई है, लेकिन प्रशासन मौन साधे बैठा है।
- प्रमुख वादे जो ठंडे बस्ते में चले गए……
मंगल भवन का रखरखाव:- शहर का महत्वपूर्ण मंगल भवन आज उचित देखभाल के अभाव में बदहाली का शिकार है। देखरेख न होने से भवन खंडहरनुमा होता जा रहा है।

बस स्टैंड सौंदर्यीकरण:- यात्रियों की सुविधाओं और शहर की सुंदरता के लिए बस स्टैंड का कायाकल्प करने का वादा किया गया था, जो अब तक केवल कागजों और भाषणों तक सीमित है।
बुनियादी ढांचा:- शहर के अन्य छोटे-बड़े विकास कार्य भी कछुआ गति से चल रहे हैं या शुरू ही नहीं हुए हैं।
जनता में भारी आक्रोश:- “आने वाले चुनाव में सिखाएंगे सबक“
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के नाम पर उनसे वोट तो ले लिए गए, लेकिन जीत के बाद अध्यक्ष साहब जनता की सुध लेना भूल गए हैं।
नागरिकों ने दो टूक शब्दों में कहा….
अध्यक्ष महोदय ने कहा था कि जीतते ही सबसे पहला कार्य मुक्तिधाम का करवाऊंगा, क्या अब उन्हें अपने वादे याद नहीं? वादे सिर्फ वोट हासिल करने का जरिया बनकर रह गए हैं।”
लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आगामी चुनाव में इसका खामियाजा जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ेगा। विकास के नाम पर उपेक्षा अब जनता बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
मौन साधे बैठें जिम्मेदार…
विपक्ष और आम जनता के बढ़ते दबाव के बावजूद नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से इन अधूरे वादों पर अब तक कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आया है। शहरवासी अब भी इस उम्मीद में हैं कि शायद उनकी अगली कार्ययोजना में इन मूलभूत समस्याओं का समाधान शामिल हो।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनावी मंच से किए गए भारी-भरकम वादे आखिर कब हकीकत का रूप लेंगे? या फिर धरमजयगढ़ की जनता अगले पांच साल इसी तरह ‘विकास’ का इंतजार करती रहेगी?



