किसानों की उपजाऊ जमीन पर मलबे का पहाड़, एसईसीएल और ठेका कंपनी पर गंभीर आरोप

छाल :- रायगढ़ जिले के छाल उपक्षेत्र में संचालित लात खुली कोयला खदान के विस्तारीकरण को लेकर प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि उत्पादन बढ़ाने की कवायद में उनकी निजी भूमि पर बिना विधिवत अधिग्रहण के कब्जा कर खनन कार्य से जुड़े मलबे और ओबी (ओवरबर्डन) का ढेर लगाया जा रहा है, जिससे उनकी कृषि भूमि और आजीविका प्रभावित हो रही है।
3 से 6 मिलियन टन उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, किसानों की चिंता बढ़ी
जानकारी के अनुसार, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा लात खुली खदान की उत्पादन क्षमता 3 मिलियन टन से बढ़ाकर 6 मिलियन टन करने के लिए विस्तारीकरण कार्य किया जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार किसी भी खनन परियोजना के विस्तार से पूर्व प्रभावित भूमि का अधिग्रहण, उचित मुआवजा एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। लेकिन ग्राम पंचायत एडू क्षेत्र में इन प्रक्रियाओं को पूर्ण किए बिना कार्य शुरू कर दिया गया है।
किसानों की जमीन पर ओबी और मिट्टी का ढेर लगाने का आरोप
पीड़ित किसान जय राठिया एवं उत्तरा कुमार राठिया का आरोप है कि उनकी निजी भूमि पर बिना अनुमति और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के ठेका कंपनी एसकेए द्वारा ओबी और मिट्टी का विशाल ढेर डाल दिया गया है। किसानों का कहना है कि इससे उनकी उपजाऊ भूमि और फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।जब किसानों ने इसका विरोध किया तो ठेका कंपनी के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदारी एसईसीएल पर होने की बात कही। वहीं किसानों का सवाल है कि यदि भूमि का अधिग्रहण अब तक नहीं हुआ है तो निजी जमीन पर कार्य करने की अनुमति आखिर किसने दी।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
मामले में प्रभावित किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से संबंधित अधिकारियों और विभागों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। उनका आरोप है कि उन्हें केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।
प्रशासन और एसईसीएल से कार्यवाही की मांग
ग्रामीणों एवं प्रभावित किसानों ने रायगढ़ जिला प्रशासन तथा एसईसीएल प्रबंधन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने तथा प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर उनकी भूमि और आजीविका के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और प्रभावित किसानों को कब तक राहत मिल पाती है।



