हर साल रिहायशी इलाकों में पटाखा दुकानें, इस बार प्रशासन क्या करेगा?


चंद्रशेखरपुर से नावापारा, छाल और हाटी तक रिहायशी क्षेत्रों में पटाखा दुकानों के संचालन पर प्रशासन की निगरानी पर सवाल, खुले स्थानों पर दुकानें लगवाने की मांग
छाल। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखों की दुकानों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हर वर्ष जिला प्रशासन द्वारा पटाखा दुकान संचालकों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इन दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य आगजनी, दुर्घटना और किसी भी प्रकार की जनहानि को रोकना होता है। लेकिन छाल क्षेत्र में इन नियमों के पालन को लेकर हर वर्ष सवाल खड़े होते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि छाल क्षेत्र में चंद्रशेखरपुर से नावापारा, छाल और हाटी तक कई स्थानों पर रिहायशी इलाकों में ही पटाखों की दुकानें संचालित होती हैं। बताया जाता है कि अस्थायी लाइसेंस के आधार पर दुकानें लगाई जाती हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों और निर्धारित स्थानों के पालन को लेकर जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पटाखों की बिक्री होने से किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। यदि ऐसी जगहों पर आगजनी या विस्फोट जैसी घटना होती है, तो इसका खामियाजा आसपास रहने वाले परिवारों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है। इसके बावजूद यदि नियमों की अनदेखी होती है तो यह प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या इस वर्ष बदलेगी व्यवस्था या फिर वही पुराना ढर्रा..?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस वर्ष प्रशासन पटाखा दुकानों को रिहायशी इलाकों से दूर निर्धारित खुले और सुरक्षित स्थानों पर संचालित करवाने की व्यवस्था करेगा..? क्या संबंधित विभाग लाइसेंस जारी करने के साथ-साथ मौके पर सुरक्षा मानकों की जांच भी करेंगे…? या फिर हर वर्ष की तरह इस बार भी रिहायशी इलाकों में पटाखों की बिक्री होती रहेगी और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने रहेंगे..?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि दीपावली से पहले प्रशासन द्वारा छाल क्षेत्र के सभी पटाखा दुकानों का निरीक्षण किया जाए। अस्थायी लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, दुकानों के बीच निर्धारित दूरी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही पटाखा दुकानों का संचालन आबादी से दूर सुरक्षित एवं निर्धारित खुले स्थानों पर कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि दीपावली के इस सीजन में प्रशासन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाता है या फिर छाल क्षेत्र में इस बार भी पुराने ढर्रे पर ही पटाखों की बिक्री जारी रहती है।



