161 मिलियन टन कोयला खनन की तैयारी, जमीन देने वाले किसानों ने मांगा चार गुना मुआवजा, और नौकरी…


दुर्गापुर कोयला परियोजना में मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध, ‘एक खदान-एक दाम’ की मांग पर अड़े प्रभावित किसान
1151.994 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण के बदले उच्चतम वर्तमान बाजार भाव का चार गुना मुआवजा और प्रत्येक दो एकड़ पर एक नौकरी देने की मांग, मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री तक भेजा ज्ञापन
धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित SECL की दुर्गापुर कोयला खनन परियोजना को लेकर प्रभावित किसानों और प्रबंधन के बीच मुआवजे एवं पुनर्वास के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही है। परियोजना से प्रभावित किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, SECL के CMD तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धरमजयगढ़ को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रभावित किसानों के अनुसार, दुर्गापुर कोयला खनन परियोजना के लिए धरमजयगढ़ तहसील के ग्राम धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, शाहपुर, दुर्गापुर, तराईमार, बायसी एवं बायसी कॉलोनी की कुल 1151.994 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित की जा रही है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर SECL प्रबंधन के साथ अब तक सहमति नहीं बन पाई है। इसका प्रमुख कारण किसानों की मांगों पर प्रबंधन की ओर से अपेक्षित सहमति नहीं मिलना बताया जा रहा है।
‘एक खदान-एक दाम’ के आधार पर मुआवजे की मांग
प्रभावित किसानों की प्रमुख मांग है कि परियोजना के अंतर्गत अधिग्रहित सभी निजी भूमि का मुआवजा एक समान नीति के तहत उच्चतम वर्तमान बाजार भाव का चार गुना दिया जाए। किसानों ने इसके लिए ‘एक खदान-एक दाम’ का सिद्धांत लागू करने की मांग की है, ताकि एक ही कोयला परियोजना के लिए अलग-अलग दरों पर मुआवजा देने की स्थिति निर्मित न हो।
इसके अलावा किसानों ने प्रत्येक दो एकड़ भूमि के बदले एक व्यक्ति को रोजगार देने तथा वनाधिकार पट्टे के अंतर्गत आने वाली भूमि के लिए भी नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने की मांग उठाई है।
2830 परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी अधर में
किसानों ने ज्ञापन में बताया है कि प्रस्तावित कोयला परियोजना से लगभग 2830 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इन परिवारों को कहां और किस व्यवस्था के तहत पुनर्वासित किया जाएगा, इस संबंध में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही गई है। प्रभावितों का कहना है कि मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होने के कारण किसानों में असमंजस और नाराजगी बनी हुई है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि SECL प्रबंधन द्वारा सर्वेक्षण की प्रक्रिया को लेकर गांवों में भय और असमंजस का माहौल बन रहा है। उनका कहना है कि वे कोयला परियोजना के विरोध में नहीं हैं, बल्कि अपनी जमीन के उचित मुआवजे, रोजगार और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
20 वर्षों में 161 मिलियन टन कोयला खनन का प्रस्ताव
ज्ञापन में किसानों ने उल्लेख किया है कि प्रस्तावित परियोजना के तहत आगामी 20 वर्षों में लगभग 161 मिलियन टन कोयले का खनन किया जाना है। ऐसे में प्रभावित किसानों का कहना है कि परियोजना से बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ होने की संभावना है, इसलिए भूमि देने वाले किसानों और प्रभावित परिवारों के हितों की भी उचित सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
न्यायालय के फैसलों और अधिनियमों का दिया हवाला
अपनी मांगों के समर्थन में किसानों ने सर्वोच्च न्यायालय के नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट बनाम विट्ठल राव (1973) मामले का हवाला देते हुए कहा है कि एक ही उद्देश्य के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में भेदभाव नहीं होना चाहिए। किसानों ने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लेख करते हुए एक ही परियोजना में अलग-अलग मुआवजा दरें निर्धारित किए जाने पर आपत्ति जताई है।
इसके साथ ही कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम, 1957 की धारा 13 तथा भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 26 का भी उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय कोयला मंत्री से हस्तक्षेप की अपील
प्रभावित किसानों ने शासन एवं SECL के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि उनकी जायज मांगों पर सहमति बनाने के लिए प्रबंधन को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। किसानों का कहना है कि यदि मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास के मुद्दों पर स्पष्ट एवं न्यायसंगत निर्णय लिया जाता है तो परियोजना को लेकर बना गतिरोध समाप्त हो सकता है और खनन कार्य प्रारंभ करने का रास्ता भी आसान हो सकता है।
अब देखना होगा कि किसानों की मांगों पर SECL प्रबंधन और शासन स्तर पर क्या पहल की जाती है तथा दुर्गापुर कोयला परियोजना से प्रभावित 2830 परिवारों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए क्या निर्णय लिया जाता है।



