छाल एसईसीएल में ठेका श्रमिकों का फूटा गुस्सा, SKA कंपनी पर कम मजदूरी, कैश पेमेंट और बोनस हड़पने के आरोप

ड्राइवर, पीसी ऑपरेटर, हेल्पर और सुपरवाइजरों ने तहसीलदार से की शिकायत। बैठक में कंपनी प्रबंधन को सख्त निर्देश, सितंबर से बैंक खाते में भुगतान और पेमेंट स्लिप देने के आदेश
रायगढ़ :- छाल एसईसीएल खदान के अधीनस्थ ठेका कंपनी मेसर्स सुनील कुमार अग्रवाल (लेंध्रा) यानी एसकेए के खिलाफ कार्यरत श्रमिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ड्राइवर, पीसी ऑपरेटर, हेल्पर और सुपरवाइजरों ने मजदूरी, बोनस, भुगतान व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों को लेकर छाल तहसीलदार, थाना, श्रम विभाग, छाल सबएरिया ऑफिस, जीएम कार्यालय और रायगढ़ कलेक्ट्रेट तक ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की मांग की है।

एचपीसी दर से कम मजदूरी देने का आरोप
श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी द्वारा उन्हें कोल माइंस के लिए निर्धारित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) की दर के अनुसार मजदूरी नहीं दी जा रही है। श्रमिकों के मुताबिक कुशल कर्मचारियों से पूरे 30 दिन काम कराने के बाद भी करीब 25 हजार रुपये मासिक भुगतान किया जा रहा है।
श्रमिकों का दावा है कि एचपीसी दर के अनुसार कुशल श्रमिक की दैनिक मजदूरी करीब 1,421 रुपये है। 30 दिन के हिसाब से यह राशि करीब 42,630 रुपये बैठती है। उनका कहना है कि पीएफ कटौती के बाद भी करीब 40 हजार रुपये से अधिक राशि खाते में मिलनी चाहिए।
75 प्रतिशत श्रमिकों को कैश पेमेंट का आरोप
श्रमिकों ने कंपनी की भुगतान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि खदान में दो वर्ष से अधिक समय से काम कर रही एसकेए कंपनी में करीब 75 प्रतिशत श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नकद किया जाता है, जबकि केवल करीब 25 प्रतिशत श्रमिकों को बैंक खाते के माध्यम से भुगतान किया जाता है।श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कैश भुगतान की व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। उन्होंने पूरे भुगतान को बैंकिंग माध्यम से कराने की मांग की है।
कुछ श्रमिकों को बैंक में पैसा, फिर भी पेमेंट स्लिप नहीं
श्रमिकों का कहना है कि जिन कर्मचारियों की मजदूरी बैंक खाते में जमा की जाती है, उन्हें भी कंपनी की ओर से पेमेंट स्लिप नहीं दी जाती। कई बार मांग करने के बावजूद प्रबंधन द्वारा इस संबंध में उचित जानकारी नहीं दी गई।
दो साल से बोनस नहीं मिलने का दावा
श्रमिकों ने पिछले दो वर्षों से बोनस नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एसईसीएल की खदानों में पात्र श्रमिकों को मिलने वाली बोनस राशि का लाभ उन्हें नहीं मिला है। श्रमिकों ने दोनों वर्षों की लंबित बोनस राशि का भुगतान कराने की मांग की है।
सेफ्टी किट के लिए भी राशि मांगने का आरोप
खदान में सुरक्षा को लेकर भी श्रमिकों ने गंभीर शिकायत की है। उनका कहना है कि सेफ्टी हेलमेट, सेफ्टी शूज और रिफ्लेक्टिव जैकेट जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए, लेकिन आरोप है कि इसके लिए श्रमिकों से राशि की मांग की जाती है। श्रमिकों का कहना है कि कई कर्मचारियों को अब तक सेफ्टी हेलमेट तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने तत्काल सभी श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की।
तहसीलदार ने कंपनी प्रबंधन को लगाई फटकार
श्रमिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए छाल तहसीलदार लोमेश मिरी ने शुक्रवार को एसईसीएल अधिकारियों, एसकेए कंपनी के जीएम विजय पारिक और श्रमिकों के साथ बैठक की। बैठक में श्रमिकों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों पर चर्चा की गई।
तहसीलदार ने स्पष्ट कहा कि श्रमिकों का शोषण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को श्रमिकों को निर्धारित कोल माइंस श्रमिक दर के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने, सभी मजदूरों का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से करने और नकद भुगतान की व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश दिए।
सितंबर से बैंक खाते में भुगतान और पेमेंट स्लिप के निर्देश
तहसीलदार ने कंपनी प्रबंधन को निर्देश दिया कि सितंबर माह से सभी श्रमिकों का भुगतान बैंक खाते में किया जाए और प्रत्येक श्रमिक को पेमेंट स्लिप उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सभी श्रमिकों को आवश्यक सेफ्टी किट जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
तहसीलदार ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशों का पालन नहीं होने अथवा कंपनी की ओर से लापरवाही बरते जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब श्रमिकों की नजर कंपनी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर है। बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद क्या वास्तव में एचपीसी दर के अनुसार मजदूरी, लंबित बोनस, पेमेंट स्लिप और सुरक्षा उपकरणों की सुविधा मिलती है, या आने वाले समय में श्रमिकों को आंदोलन का रूप अपनाना पड़ेगा।



