पुरुंगा माइंस को लेकर गतिरोध बरकरार, जनता अड़ी
अबतक किसी भी कंपनी ने अपने कार्यों से जनता के बीच भरोसा नहीं जगाया
अंबुजा सीमेंट्स को आवंटित कोल ब्लॉक में होना है अंडरग्राउंड खनन
धरमजयगढ़। पुरुंगा माइंस के लिए होने वाली जनसुनवाई पर अब भी हंगामा मचा हुआ है। स्थानीय नेताओं से अलग ग्रामीणों ने एकजुट होकर जनसुनवाई के विरोध में आवाज उठाई है। अंडरग्राउंड माइंस होने की वजह से इसके दुष्प्रभाव अलग तरह के हैं। ग्रामीणों तक सही जानकारी नहीं पहुंच रही है।
पुरुंगा कोल ब्लॉक का आवंटन अडाणी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स को हुआ है। पुरुंगा कोल ब्लॉक में इसलिए अंडरग्राउंड माइनिंग किया जा रहा है क्योंकि स्ट्रिपिंग रेशियो बहुत ज्यादा है। ओपन कास्ट होता तो मुआवजे के अलावा खनन की लागत बहुत ज्यादा होती। 11 नवंबर को इसके लिए जनसुनवाई होनी है। इससे पहले ही ग्रामीण भूमिगत खदान से होने वाले नुकसान के चलते विरोध कर रहे हैं।पहले इस कोल ब्लॉक का आवंटन छ.ग. नेचुरल रिसोर्सेस प्रालि कंपनी को किया गया था। बाद में स्वामित्व अंबुजा सीमेंट को ट्रांसफर किया गया है। छ.ग. नेचुरल रिसोर्सेस से अंबुजा सीमेंट को ओनरशिप ट्रांसफर की गई है। छाल तहसील के कोकदार, तेंदुमुड़ी, पुरुंगा और समरसिंघा गांव की 870 हेक्टेयर भूमि इस माइंस के लिए अधिग्रहित की जानी है। सालाना 2.25 मिलियन टन कोयला उत्पादन होना है। चार गांवों में 869 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। चारों गांवों में छोटे-छोटे तालाब, बोरवेल आदि हैं। बीच में प्रशासन की मध्यस्थता से आपस में बातचीत हुई लेकिन आंदोलन दोबारा खड़ा हो गया है। गांवों में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। ग्रामीणों की जमीन इससे प्रभावित नहीं हो रही है। अंडरग्राउंड माइंस के ग्रेट के पास कुछ जमीन ली जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि भूजल स्रोत और पीएमजीएसवास सडक़ बर्बाद हो जाएगी।
हर माइंस का हो रहा विरोध
किसी भी व्यक्ति को उसकी जड़ों से, उसकी पैतृक संपत्ति, पैतृक आवास से बेदखल किया जाए तो विरोध स्वाभाविक है। रायगढ़ जिले में किसी भी कंपनी ने अपने कार्यों से जनता के बीच भरोसा नहीं जगाया है। यही कारण है कि अब किसी भी कंपनी पर लोग भरोसा नहीं कर रहे हैं। वेदांता, जेएसपीएल, जेपीएल, अंबुजा सबकी कोल माइंस का विरोध हो रहा है।



