गरीब ग्रामीण से 40 हजार की मांग! पुलिस की कार्यशैली कटघरे में

इस थाना पुलिस पर उगाही का आरोप, नेताओं के नाम पर बचाव की चर्चा
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जहां एक ओर जिला पुलिस कप्तान द्वारा ‘ऑपरेशन आघात’ चलाकर युवाओं को नशे से दूर रखने और अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार कार्यवाही की जा रही है, वहीं दूसरी ओर छाल थाना पुलिस पर इस अभियान को कमाई का जरिया बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
छाल थाना क्षेत्र से सामने आए एक कथित मामले ने पुलिस महकमे के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अवैध महुआ शराब के नाम पर कार्यवाही के बाद एक गरीब ग्रामीण से मोटी रकम वसूले जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

दबिश, जब्ती और फिर ‘डील’ का खेलसूत्रों के मुताबिक, बीते 24 मई को छाल पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र के एक गांव में अवैध महुआ शराब बनाई जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम गवाहों के साथ मौके पर पहुंची और घर में दबिश देकर शराब तथा बनाने में उपयोग होने वाले सामान को जब्त कर लिया।
कार्यवाही के बाद मामला अचानक नया मोड़ लेता नजर आया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने संबंधित ग्रामीण को जेल भेजने का भय दिखाकर मामला रफा-दफा करने के एवज में 40 हजार रुपये की मांग की। बताया जा रहा है कि भयभीत ग्रामीण ने घर का सामान गिरवी रखकर तत्काल 20 हजार रुपये की व्यवस्था की और पुलिस टीम को सौंप दिए। बाकी रकम के लिए कुछ दिनों की मोहलत मांगी गई, जिसके बाद टीम वहां से लौट गई।
गांव में फैली चर्चा, सरपंच तक पहुंची शिकायत
ग्रामीण पर बाकी 20 हजार रुपये की व्यवस्था का दबाव लगातार बना रहा। आखिरकार मामला गांव के लोगों और सरपंच तक पहुंच गया। गांव के जिम्मेदार नागरिकों ने इसे गरीब व्यक्ति के साथ अन्याय बताते हुए उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने का फैसला लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल अवैध वसूली का मामला नहीं बल्कि वर्दी की आड़ में गरीबों को डराकर शोषण करने का गंभीर उदाहरण है।
अब नेताओं के नाम का सहारा?
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंची, संबंधित पुलिस स्टाफ में हड़कंप मच गया। चर्चा यह भी है कि अब मामले से खुद को बचाने के लिए कुछ पुलिसकर्मी कथित तौर पर राजनीतिक रसूखदारों और सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं के नाम का सहारा ले रहे हैं।
कथित तौर पर यह दलील दी जा रही है कि वसूली गई रकम पुलिस ने अपने लिए नहीं, बल्कि ऊपर तक पहुंचाने के लिए ली थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ अपनी बदनामी से बचने का प्रयास है, या फिर वाकई अवैध धंधों से होने वाली कमाई का हिस्सा खाकी से लेकर खादी तक पहुंचता है?
कप्तान की सख्ती बनाम थाने की कार्यशैली
एक तरफ जिला पुलिस कप्तान ‘ऑपरेशन आघात’ के जरिए अपराध और नशे के खिलाफ सख्त अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छाल थाना पुलिस पर लगे ये आरोप विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब सबकी नजर जिला पुलिस प्रशासन पर टिकी है। क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पीड़ित ग्रामीण को न्याय और उसकी रकम वापस मिलेगी? या फिर मामला राजनीतिक दबाव और रसूख के बीच ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
फिलहाल, पूरे इलाके में इस कथित वसूली प्रकरण की चर्चा जोरों पर है और लोग कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं।



